नहीं फेंकने का इरादा है
जो हाथ में थामा है,
नहीं चन्द लम्हों में,
ना ही चन्द सालों में,
छोड़ने का इरादा है,
यह थो जिन्दगी भर का नाता है!
इरादा है दुनिया बदल ने का,
आख़िर उठाया है जो हाथ में,
वह कोई तलवार से न कम था खथर्नाक ,
नाहीं किसी तीर से कम तेज़ ,
आख़िर उठाया जो हाथ में है,
वोह तो एक बारूद से न था कम,
सारी दुनिया जिसे जानती है,
और जिसे कहते है हम कलम!
Saturday, December 13, 2008
Monday, December 8, 2008
khatl
कत्ल करने के इरादे से निकले थे हम,
हाथ में तलवार लिए चले थे हम,
'खुनी को भी जब आखरी ख्वाइश का मौका देते हैं हम,
आप थो सिर्फ़ दीवाने हें,
ये सोचकर, मौका दिया आपको,
आवाज़ सुनी आपकी,
येः न जाना की चंद ही लम्हों में हम ख़ुद शिकार बनेंगे,
तीर आपने फेंका,
बेबुस शिकार हम हो गए!
हाथ से तलवार हमारा छूटा ,
फ़िदा हम हो गए!
हाथ में तलवार लिए चले थे हम,
'खुनी को भी जब आखरी ख्वाइश का मौका देते हैं हम,
आप थो सिर्फ़ दीवाने हें,
ये सोचकर, मौका दिया आपको,
आवाज़ सुनी आपकी,
येः न जाना की चंद ही लम्हों में हम ख़ुद शिकार बनेंगे,
तीर आपने फेंका,
बेबुस शिकार हम हो गए!
हाथ से तलवार हमारा छूटा ,
फ़िदा हम हो गए!
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