कत्ल करने के इरादे से निकले थे हम,
हाथ में तलवार लिए चले थे हम,
'खुनी को भी जब आखरी ख्वाइश का मौका देते हैं हम,
आप थो सिर्फ़ दीवाने हें,
ये सोचकर, मौका दिया आपको,
आवाज़ सुनी आपकी,
येः न जाना की चंद ही लम्हों में हम ख़ुद शिकार बनेंगे,
तीर आपने फेंका,
बेबुस शिकार हम हो गए!
हाथ से तलवार हमारा छूटा ,
फ़िदा हम हो गए!
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

1 comment:
अच्छा ख़त है आपका
लिखते रहिये, निखार आता जाएगा
बस भावनाएं कम न होनी चाहियें
Post a Comment