Wednesday, February 26, 2014

Yeh geet kaise bana?


Toota hua dil tha, haath mein kalam tha, bechaini thi

yaadein thi, mehfil tha, aakhir kagaz khudh bha khudh 

bhar gaya.


Woh ansuen, woh ankaha dard, ab uthar aaya dil se us

 kagaz ke tukde par, woh kagaz ka tukda udh gaya, aur 

raha gaya phir se ummeed!!!

Saturday, December 13, 2008

नहीं फेंकने का इरादा है
जो हाथ में थामा है,
नहीं चन्द लम्हों में,
ना ही चन्द सालों में,
छोड़ने का इरादा है,
यह थो जिन्दगी भर का नाता है!
इरादा है दुनिया बदल ने का,
आख़िर उठाया है जो हाथ में,
वह कोई तलवार से न कम था खथर्नाक ,
नाहीं किसी तीर से कम तेज़ ,
आख़िर उठाया जो हाथ में है,
वोह तो एक बारूद से न था कम,
सारी दुनिया जिसे जानती है,
और जिसे कहते है हम कलम!

Monday, December 8, 2008

khatl

कत्ल करने के इरादे से निकले थे हम,
हाथ में तलवार लिए चले थे हम,
'खुनी को भी जब आखरी ख्वाइश का मौका देते हैं हम,
आप थो सिर्फ़ दीवाने हें,
ये सोचकर, मौका दिया आपको,
आवाज़ सुनी आपकी,
येः न जाना की चंद ही लम्हों में हम ख़ुद शिकार बनेंगे,
तीर आपने फेंका,
बेबुस शिकार हम हो गए!
हाथ से तलवार हमारा छूटा ,
फ़िदा हम हो गए!

Thursday, September 25, 2008

Intezaar

हमें इतना न इंतज़ार करवओ, की कम्बक्थ इंतज़ार भी हमसे खफा हो जाए.

gham

हमको हमारे ही ग़म ने मार दिया!
एक तरफ़ हसीं शाम,
दूसरी तरफ़ जाम,
और बीच में हम और हमारी ये बेदर्द बीमारी....
अब जी रहे हैं तो, सिर्फ़ उस लम्हे के इंतज़ार में,
जब इन होंटों की तन्हाई दूर हुए,
बस जाम फिर से हाथ में आ जाए!
और हमारे सारे दर्द हमें इस तन्हाई से छुडाए!

intezaar

उन्हें इंतज़ार था हमसे सुनने के लिए
बेचैनी थी हमारी शायरी के लिए मगर,
कमबख्त दिल का अपना अंदाज़ होता है
वोह कहता है...जब सामने आशिक है थो
यह जुबां कैसे चलायें?
चीर कर दिल की बातें कैसे सुनाएं?
जो यह खूबसूरत आँखें कहती हैं,
वोह शायद ही कोई कलम लिख पाए!

jaam

कोई हमें जाम क्या पिलाएगा,
हम थो बिन पिए ही बहक गए हैं,
तुम्हारी आंखों से जो शरारत बहती है,
बस, वही हमें शराबी बना देती है.