हमको हमारे ही ग़म ने मार दिया!
एक तरफ़ हसीं शाम,
दूसरी तरफ़ जाम,
और बीच में हम और हमारी ये बेदर्द बीमारी....
अब जी रहे हैं तो, सिर्फ़ उस लम्हे के इंतज़ार में,
जब इन होंटों की तन्हाई दूर हुए,
बस जाम फिर से हाथ में आ जाए!
और हमारे सारे दर्द हमें इस तन्हाई से छुडाए!
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment