उन्हें इंतज़ार था हमसे सुनने के लिए
बेचैनी थी हमारी शायरी के लिए मगर,
कमबख्त दिल का अपना अंदाज़ होता है
वोह कहता है...जब सामने आशिक है थो
यह जुबां कैसे चलायें?
चीर कर दिल की बातें कैसे सुनाएं?
जो यह खूबसूरत आँखें कहती हैं,
वोह शायद ही कोई कलम लिख पाए!
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment