Thursday, September 25, 2008

तीन अक्षर for bb

मैंने आख़िर खत लिख डाला
दिल की बात सुना डाला
हाँ, अपना वज़न कुछ कम कर डाला
दर्द--दिल का बयां जो कर डाला
बस तीन ही लफ्जों में इतना कुछ कर डाला
उनके चेहरे की मुस्कराहट वापस ला डाला
सारे गिले शिक्वे मिटा डाला
हमारे तालुक़ात कायम कर डाला
बस तीन ही शब्द में ये सब कर डाला
मरते हैं हम एक बार
मगर कभी कभी जी लेतें हैं दो बार
एहसासों को दबाना मत
कह डाला जो जुबां पर है
आख़िर तीन ही थो लफ्जों का खेल हैं ये
गुज़रे हुए कल को भुला डालो!
भाई से माफ़ी मांग डालो!
लिखो "मुझे माफ़ करो"!

4 comments:

bijnior district said...

हिंदी के लिखाड़ियों की दुनिया में आपका स्वागत। खूब लिखे। अच्छा लिखे । नाम कमाएं। हार्दिक शुभकामनायें। कृपया सैटिंग मे जाकर वर्ड वैरिफिकेशन हटा दें।

Unknown said...

हिन्दी ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है, खूब लिखें, मेरी शुभकामनायें… एक अर्ज है कि कृपया वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें, टिप्पणी करने में बाधक बनता है… धन्यवाद्।

संगीता पुरी said...

आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

Kveens said...

Hum aap sab ke behad shukra guzaar hain. Kripaya isi tarah sahyog dethe raheye...aur hum kalam thamthe jaayenge.
Veena